|| आँखों में रहता है कोई ||
- पवन प्रताप सिंह 'पवन'
आँखों की कोरों से अक्सर
चुप-चुपके बहता है कोई
आँखों में रहता है कोई ।
गीली आँखें बाँच रहीं हैं
हिय के कोरे पन्ने
पन्ने बहुत पुराने
धुँधलाए-से
फटे फटे
नमकीनी अंतस-पन्नों का
खारापन सहता है कोई
आँखों में रहता है कोई ।
मन दर्पण में दूर-दूर तक
प्रतिबिंबित बस तुम हो
तुम हो ओस सुबह-सी
बिखरी-बिखरी
कहीं-कहीं
अभी न निकलो
तुम सदियों तक
सूरज से कहता है कोई
आँखों में रहता है कोई ।
- पवन प्रताप सिंह 'पवन'
सौन्हर, नरवर (म.प्र.)
+918819959618
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- पवन प्रताप सिंह 'पवन'
आँखों की कोरों से अक्सर
चुप-चुपके बहता है कोई
आँखों में रहता है कोई ।
गीली आँखें बाँच रहीं हैं
हिय के कोरे पन्ने
पन्ने बहुत पुराने
धुँधलाए-से
फटे फटे
नमकीनी अंतस-पन्नों का
खारापन सहता है कोई
आँखों में रहता है कोई ।
मन दर्पण में दूर-दूर तक
प्रतिबिंबित बस तुम हो
तुम हो ओस सुबह-सी
बिखरी-बिखरी
कहीं-कहीं
अभी न निकलो
तुम सदियों तक
सूरज से कहता है कोई
आँखों में रहता है कोई ।
- पवन प्रताप सिंह 'पवन'
सौन्हर, नरवर (म.प्र.)
+918819959618





